दीनानाथ गड़ेरिया भदोही वाले की छवि खराब करने के लिए उनके लोगों ने ही रचा साजिश
एक भेंड़ चराने वाले की बढ़ती हुई लोकप्रियता खटकने लगी, फिर शुरू हुई छवि खराब करने की साजिश!
अभी हाल में ही सोशल मीडिया पर पाल समाज के कुछ समाजसेवियों, क्रांतिकारियों और सामाजिक संगठनों के बीच कुछ झड़प देखने देखने को मिला और देखते ही देखते एक ही संगठन के कुछ पदाधिकारी दो ग्रुपों में बंट गये और एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए।
इसके बारें में जब जानकारी जुटाने के लिए और सच्चाई को समाज के सामने ले आने के लिए हमारी टीम ने भदोही के समाजसेवी दीनानाथ गड़ेरिया से कुछ सवाल किया तो उन्होंने की राज खोले!
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि "लगभग एक साल से वे अपने जिले के ही कुछ साथियों के साथ मिलकर सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर पाल समाज को आगे बढ़ाने और उनके ऊपर हो रहे शोषण अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के शुरुआत किया" । धीरे धीरे उनकी यह मेहनत और सोशल मीडिया पर भेंड़ चराते हुए एकदम देशी देहाती अंदाज में पोस्ट की गई विडियो लोगों को पसंद आने लगी। अपने समाज के प्रति जागरूकता फैलाने और जमीनी स्तर पर भी जगह जगह पहुंच कर लोगों की मदद करने की दिनचर्या ने उन्हें और उनके कुछ साथियों को और भी चर्चित बना दिया।
इसी बीच तमाम लोगों से जान पहचान बढ़ी और अपने समाज के ही एक संगठन शेफर्ड टाइगर फोर्स इंडिया में शामिल होने का भी सौभाग्य मिला। संगठन में जुड़ने के बाद और भी ताकत और जोश के साथ समाज के लिए काम करना शुरू हुआ। तमाम मुद्दों पर समाज के लिए लड़ाई लड़ी गई। इसी बीच बनारस में मणिकर्णिका घाट पर सरकार द्वारा राजमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की प्रतिमा तोड़े जाने की खबर मिली।
अहिल्याबाई होल्कर जी की विरासत बचाने के लिए समाज के तमाम संगठनों ने मिलकर एसटीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेफर्ड धामू पाल की अगुवाई में एक बड़ा आंदोलन हुआ। जिसमें समाज के तमाम लोग शामिल हुए, इस दौरान बिहार गडरिया मोर्चा के अध्यक्ष संतोष पाल, होलकर सेना अध्यक्ष विवेक टाइगर, शेफर्ड धामू पाल, दीनानाथ गड़ेरिया, सुग्गन पाल, धर्मेंद्र पाल, आलोक पाल जैसे समाज के कुछ अट्ठारह क्रांतिकारी साथियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और ये सभी जेल भी गये। इस दौरान इन सभी पर पांच धाराओं में मुकदमा भी दर्ज हुआ।
इस आंदोलन से ही दीनानाथ गड़ेरिया को एक नई पहचान मिली और सबसे अधिक चोटिल होने के कारण इस पुरे आंदोलन में सोशल मीडिया पर सबसे अधिक चर्चा दीनानाथ जी की हुई और वे समाज के लिए हीरो बन गये। इसके बाद भी भदोही के क्रांतिकारी साथियों विद्याधर पाल, गुलाब धर पाल, अजय पाल, दीपक पाल जैसे तमाम सहयोगियों के साथ मिलकर समाज सेवा का काम शुरू ही रहा। इस मेहनत और लगन के बदौलत दीनानाथ गड़ेरिया और उनके साथियों की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि अब यह उनके ही समाज और संगठन के कुछ लोगों की नजर में खटकने लगी।
इसके बाद कई बार देखा गया कि जब भी कोई नया काम करने की शुरुआत भदोही का ग्रुप करता तो फिर संगठन के ही कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से उसका विरोध शुरू कर देते। इन हरकतों की वजह से धीरे धीरे यह समझ आने लगा कि अब संगठन के लोगों को ही इस ग्रुप की लोकप्रियता खटकने लगी है जिसके वजह से उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
फिर भी कुछ महीनों तक संगठन के प्रति ईमानदारी से यह ग्रुप काम करता रहा लेकिन कुछ चीजें ऐसी सामने आई की यह साफ हो गया कि संगठन के लोग जानबूझकर इस ग्रुप की छवि खराब करने कि कोशिश कर रहे हैं। दीनानाथ जी ने बातचीत में यह भी कहा कि खुद एसटीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने अपने ही कुछ पदाधिकारियों से उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ ग़लत कमेंट करना कर उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश की जिसमें एसटीएफ के युपी प्रदेश अध्यक्ष राजेश पाल जी के साथ साथ एसटीएफ के कुछ और भी पदाधिकारी शामिल रहे।
इन्हीं साजिशों की वजह से धीरे धीरे विरोध बढ़ता गया और एक दिन दीनानाथ गड़ेरिया को संगठन से बाहर कर दिया गया। जिसका असर अब सोशल मीडिया पर देखने को मिला।
इसके बावजूद भी दीनानाथ जी ने कहा कि आज भी संगठन के लिए मेरे दिल में वही प्यार है। संगठन जहां भी समाज हित के लिए काम करेगा मैं हमेशा सहयोग करूंगा क्योंकि मेरा विरोध किसी निजी व्यक्ति से हो सकता है पुरे संगठन से नहीं।
तो ये रही दीनानाथ गड़ेरिया और उनके ग्रुप की तरफ से दी गई सफाई। अब इस बारे में आप लोगों की क्या राय है कमेंट में जरूर बताएं और यदि हो सके तो दुसरे पक्ष के लोगों की सच्चाई को सामने लाने की कोशिश करें। धन्यवाद!

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